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Workshop on Indigenous Resistance


Event Start Date:
29th December 2017
Event End Date:
31st December 2017
Event Venue:
Betul, Madhya Pradesh

Dear friends,

                       The current times are one of the most difficult eras in history. Our society and civilization face grave dangers, be it through wars, environmental degradation, increasing inequality and injustice or poverty and unemployment. 

Many young people in the decades of 80’s and 90’s went away from careers and seminars to live and work in different tribal areas and started political and innovative work there. In the process, they have found some ideas of how to challenge the current order and look for alternatives, through the indigenous/tribal world-view and resistance. 

Last year, along with the Shramik Adivasi Sangathan/Kisan Adivasi Sangathan, we held a workshop in a  tribal village about the role of indigenous thought and resistance in the efforts for socialism, change and alternatives. 

We are organizing a similar work shop this year where Alok Sagar (activist working in the area for last 30 years), Phagram (Tribal political activist and representative), Anurag Modi (Activist and thinker on tribal issues), will be present along with local indigenous activists. The workshop is to be self-financed by us, therefore participants are expected to pay or collect contributions for their travel expenses to the place and  contribute 700 rs more for food and stay.
We are not offering any certificate, but a genuine chance to hold a one of a kind dialogue between activists, local residents and students/researchers interested in fundamental change.
Workshop Dates: December 29-31, 2017
Place: Markadhana village, District Betul, MP

The accommodation/food etc will be in sync with the local life, and therefore participants should be prepared for a different experience.

Interested friends are requested to contact one of the following numbers/email in advance confirming participation 

Zindabad/Johar

Iqbal Abhimanyu, Anup, Garima 

Phones – Iqbal , Anup 9873065924

[email protected]anupbali3[email protected][email protected]gmail.com
Please forward the mail to interested friends and comrades 

प्रिय साथी,

         आज के दौर में हमारा समाज और सभ्यता गंभीर संकटों का सामना कर रहे हैं: चाहे वह युद्धों, पर्यावरण के विनाश और जीवन की घटती गुणवत्ता के रूप में हो, या पहले से चली आ रही और अब और विकराल रूप धारण करती गैर बराबरी, अन्याय, गरीबी और बेरोजगारी का सवाल हो, तमाम समस्याओं के सामने हम और हमारे समूह खुद को असहाय पाते हैं|

ऐसे में विकल्प को ढूंढते हुए कई लोग अस्सी और नब्बे के दशकों में देश के अलग अलग आदिवासी इलाकों में पहुंचे और वहाँ रहकर उनके बीच में राजनैतिक और रचनात्मक काम करना शुरू किया| इन्होने पाया कि आज भी आदिवासी समाज की समझ और जीवनशैली कई मायनों में मुख्यधारा की समझ से बेहतर है|

हम चाहते हैं कि ऐसे युवा साथी जो वर्तमान व्यवस्था से असंतुष्ट हैं और उसे बदलने – बेहतर बनाने की इच्छा रखते हैं, उनका एक संवाद आदिवासियों और उनसे जुड़े कार्यकर्ताओं से होना चाहिए ताकि आगे देश- समाज के बड़े बदलाव के काम की समझ बनाने में मदद मिल सके|
देश के अलग अलग हिस्सों में चल रहे समता, विकल्प और बदलाव के प्रयासों में आदिवासी समाज और दर्शन की भूमिका पर पिछले साल हमने एक तीन दिवसीय शिविर का आयोजन किया था. यह शिविर मध्यप्रदेश के बैतूल जिले के एक आदिवासी गाँव में रखा गया था, जिसमें स्थानीय कार्यकर्ताओं और बदलाव में रूचि लेने वाले विद्यार्थियों- शोधकर्ताओं – बुद्धिजीवियों ने भागीदारी की थी. 
इस प्रक्रिया को आगे बढाते 
हुए इस वर्ष भी हम एक शिविर का आयोजन कर रहे हैं, जो समाज, राजनीति और विकल्प के बारे में सिद्धांतों और अकादमिक समझ के बरक्स जमीनी कार्यकर्ताओं के अनुभवों और आन्दोलन के इतिहास/वर्तमान पर केन्द्रित होगा.

इस शिविर में श्रमिक आदिवासी संगठन और किसान आदिवासी संगठन ले साथी आलोक सागर (जो करीब तीस साल से जंगल- गाँव में रहकर काम कर रहे हैं) फागराम (आदिवासी नेता और कार्यकर्ता) और अनुराग मोदी (लेखक और कार्यकर्ता, आदिवासी मुद्दों के चिन्तक) के साथ साथ स्थानीय आदिवासी साथी शामिल होंगे और उन्हीं के साथ हम रहेंगे- खायेंगे और बातों को समझेंगे|
यह कार्यक्रम किसी एनजीओ से मदद नहीं लेता है, और न ही हम किसी किस्म का सर्टिफिकेट देने में सक्षम हैं, यह सामाजिक-राजनैतिक कार्यकर्ताओं और छात्रों के लिए बातचीत और नए विकल्प तलाशने का एक प्रयास है.
शिविर तक यात्रा के टिकट और रहने-खाने की व्यवस्था का खर्च शिविरार्थी को खुद देना होगा या अपने गाँव/शहर में चंदा कर लाना होगा|
रहने और खाने का खर्च अंदाजन 700 रुपए होगा, इसके अलावा जीप आदि का खर्च 200 रुपये तक शायद देना पड़ सकता है, यह राशि आप अपने साथ लेकर आएं.
तारीख: 29-31 दिसंबर 

जगह: गाँव मरकाढाना, जिला बैतूल, मध्य प्रदेश. 
कृपया अपने शामिल होने की सूचना पहले से 
ईमेल अथवा फोन पर दें
टिकट/यात्रा सम्बन्धी जानकारी आगे दी जाएगी

निवेदक,

इकबाल अभिमन्यु, अनूप, गरिमा
(इस मेल को अन्य साथियों तक बढाएं)
(फोन: इकबाल- 9013002488, अनूप 9873065824)

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